झारखंड में शराब घोटाला: ईडी का शिकंजा, छत्तीसगढ़ केस का कनेक्शन

झारखंड में शराब घोटाला: ईडी का शिकंजा, छत्तीसगढ़ केस का कनेक्शन

ED Tightens the Noose Chhattisgarh Case Connection

ED Tightens the Noose Chhattisgarh Case Connection

रांची। ED Tightens the Noose Chhattisgarh Case Connection, छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड में भी शराब घोटाला केस में शिकंजा कसने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कर रही वहां की ईडी ने अपने छठे पूरक आरोप पत्र में जिन्हें घोटाले का दोषी पाया है, उनका कनेक्शन झारखंड से भी है।

उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में राज्य में छत्तीसगढ़ माडल पर लागू उत्पाद नीति में छत्तीसगढ़ के जिन पदाधिकारियों और वहां के शराब कारोबारियों का झारखंड में वर्चस्व था, सभी वहां चार्जशीटेड हैं। झारखंड में भी ईडी उनका हिसाब करेगी, क्योंकि उससे जुड़े केस झारखंड ईडी ने भी दर्ज किया है।

झारखंड में ईडी ने शराब घोटाला से जुड़े केस में दो अलग-अलग इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) कर रखा है। इनमें एक ईसीआइआर रायपुर की आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर व दूसरी ईसीआइआर झारखंड एसीबी में 20 मई 2025 को दर्ज शराब घोटाले से संबंधित एफआइआर के आधार पर दर्ज है।

दोनों ही ईसीआइआर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग झारखंड के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल से जुड़े हैं। आरोप है कि कमीशन में मोटी रकम लेकर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोपितों का झारखंड में शराब बिक्री में प्रवेश कराया।

प्लेसमेंट एजेंसियों से लेकर शराब आपूर्ति कंपनियों तक को झारखंड में काम दिया। इन कंपनियों पर करोड़ों की हेराफेरी का आरोप लगा तो उन्हें बाद में ब्लैकलिस्ट किया गया। अब भी झारखंड सरकार का 450 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया छत्तीसगढ़ की उक्त आरोपित कंपनियों पर है, जिसकी वसूली के लिए सरकार प्रयासरत है।

डक्यूमेंटेशन भी कर चुकी है झारखंड की ईडी, जांच जारी

झारखंड की ईडी ने अपने यहां दर्ज शराब घोटाले के दोनों ही मामलों में मनी लांड्रिंग के बिंदु पर जांच के बाद निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे व उनसे जुड़े अन्य आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

उनसे छत्तीसगढ़ के रायपुर में दर्ज केस में भी पूछताछ की जा चुकी है। यहां भी ईडी ने उनसे पूछताछ की थी। उनके कार्यकाल में फर्जी बैंक गारंटी पर शराब की खुदरा दुकानों में मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों के गिरफ्तार संचालकों से भी रिमांड पर पूछताछ की थी।

झारखंड ईडी भी शराब घोटाले से जुड़े सबूत व बयान को जुटाती जा रही है, ताकि पुख्ता सबूत के साथ ईडी की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सके।

छत्तीसगढ़ में जिन कंपनियों पर चार्जशीट की, उन्हें झारखंड से भुगतान

ईडी ने पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में जिन दो कंपनियों मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स ओम साईं बिवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड पर चार्जशीट की है और उनकी चल-अचल संपत्ति जब्त की है, उनपर झारखंड के अधिकारी मेहरबान रहे हैं।

पूर्व में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन आयुक्त आईएएस अमित प्रकाश (अब सेवानिवृत्त) ने 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। यह भुगतान विभागीय मंत्री के रूप में योगेंद्र प्रसाद के शपथ ग्रहण व योगदान के कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें बताए बगैर किया गया था। यह भुगतान अमित प्रकाश ने अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले ही कर दिया था।

छत्तीसगढ़ की इन दोनों ही कंपनियों ने झारखंड में वर्ष 2022 में थोक शराब की आपूर्ति की थी। उन्हें नवंबर 2024 में तत्कालीन आयुक्त ने भुगतान किया था। भुगतान वैसी स्थिति में किया गया था, जब छत्तीसगढ़ सिंडिकेट की ही झारखंड में काली सूची में डाली गई चार प्लेसमेंट एजेंसियों पर करीब 450 करोड़ रुपये का बकाया है।

इन चार प्लेसमेंट एजेंसियों में मेसर्स एटूजेड इंफ्रा सविर्सस लिमिटेड, मेसर्स इगल हंटर सोल्यूशंस लिमिटेड, मेसर्स प्राइम वन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स सुमित फैसिलिटिज शामिल हैं। इस राशि की वसूली का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।